بوادر انقسام في الهيئة الإدارية لرابطة الكتاب على خلفية ما يجري في سورية

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تاريخ النشر : 2011-08-07
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بوادر انقسام في الهيئة الإدارية لرابطة الكتاب على خلفية ما يجري في سورية

 yle="color: rgb(58 57 57); font-family: Tahoma sans-serif; font-size: 13px; line-height: 20px; "> تنذر التطورات الميدانية الجارية في سورية، وارتفاع عدد الضحايا الذين يسقطون برصاص قوات الأمن السورية بانقسام قد يسفر عن انشقاقات في الهيئة الإدارية لرابطة الكتاب الأردنيين.yle="color: rgb(58 57 57); font-family: Tahoma sans-serif; font-size: 13px; line-height: 20px; ">

yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 1.2em; padding-left: 0px; ">yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; ">
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وبدت ملامح الأزمة تلوح في الأفق بعد أن بعث عضو الهيئة الإدارية ورئيس كتلة التجمع الثقافي الديمقراطي للانتخابات الأخيرة الدكتور أحمد ماضي برسالة إلى رئيس وأعضاء في الهيئة الإدارية للرابطة تدعو إلى ضرورة المشاركة في الاعتصام الذي أقامته أمام السفارة السورية بعمان "الهيئة الأردنية لنصرة الشعب السوري"، لكن هذا المطلب لم يتم الاستجابة له، ما دعا الدكتور ماضي إلى اقتراح إصدار بيان يدين القمع الذي يتعرض له المدنيون في حماة وسواها من المدن السورية، من دون أن يحصل ماضي على أية إجابة.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وقد دفع هذا الصمت إزاء ما يجري في سورية إلى أن يتوجه الدكتور ماضي إلى الهيئة العامة للرابطة برسالة فيما يلي نصها:
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> "الزميلات والزملاء أعضاء رابطة الكتاب الأردنيين
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> أرجو لكم، برمضان الفضيل، أحسن حال، وأهدأ بال، وبعد؛
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> فلا أود أن أحدثكم عما يجري في سورية الشقيقة، ذلك لأن وسائل الإعلام المختلفة تطلعكم على الواقع الأليم لحظة بلحظة. ولا يساورني أدنى شك في أنكم على دراية به. ما أردت أن أحيطكم علماً به هو أنني خاطبت رئيس الرابطة مرتين، مرة في الصباح، وأخرى في المساء (قبل الإفطار، في اليوم الذي اعتصم فيه المتضامنون مع الشعب السوري الشقيق أمام السفارة السورية، حيث اقترحت عليه ما يلي:
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> "ما رأيكم أن تشارك الهيئة الإدارية في الاعتصام أمام السفارة السورية س. 9:30 من مساء اليوم؟".
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> اليوم المقصود كان الثلاثاء الموافق لـِ 28/7. والساعة 9:30 هي موعد اجتماع الهيئة الإدارية برمضان.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> بيد أن رئيس الرابطة لم يرد على أي من الرسالتين، الأمر الذي "حتّم" علي أن "أشكر" له هذا الموقف، قائلاً له: "لئن دل ذلك على شيء، فإنه يدل على أن الرئاسة "حكيمة".
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وبعد منتصف ليلة السبت الموافق لـِ 6/8 بعثت إليه، وإلى أعضاء الهيئة الإدارية باستثناء نائب الرئيس لتعذر مراسلته بما يلي: "تحية تضامنية مع الشعب السوري الشقيق. أقترح إصدار بيان بأسرع وقت يدين ما يجري، اليوم وليس غداً. السكوت تواطؤ بنظري". بيد أنني لم أتلق، إلى اللحظة الراهنة، رداً من أحد بشأن هذا الاقتراح.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> لقد أردت، مما تقدم، أن أحيطكم علماً بما قمت به، وأيضاً أن أتشاور معكم. وسأبقى على تواصل معكم، كلما وجدت أن ثمة موقفاً يدعوني إلى ذلك.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وفي الختام، أهنئكم بشهر رمضان الفضيل، متمنياً لكم حياة مديدة وسعيدة".
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> ومن شأن هذه الرسالة أن تعيد إلى الأذهان موقف الهيئة الإدارية السابقة التي رفضت إصدار بيان يدين ما يجري في سورية، ما أدى إلى استقالة ثلاثة أعضاء يمثلون التجمع الثقافي الديمقراطي هم الناقد فخري صالح والدكتور غسان عبد الخالق، والناقد زياد أبو لبن، حيث أصدر الثلاثة بيانا يدين القمع الوحشي الذي يتعرض له المدنيون السوريون المطالبون بالحرية والديمقراطية.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وبدأت تفاعلات رسالة الدكتور ماضي تأخذ مداها على الفور، حيث دعت الهيئة الإدارية للرابطة إلى اجتماع استثنائي مساء الأحد، بخلاف الموعد الأسبوعي التقليدي للاجتماع كل يوم ثلاثاء. ويتوقع أن تتفجر أزمة عميقة في حال أصرت الهيئة الإدارية على عدم إصدار بيان واضح مما يجري من قتل وتنكيل بحق أبناء الشعب السوري.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " /> وكانت كتلة القدس التي يؤيد كثير من أعضائها النظام السوري فازت بثمانية مقاعد في انتخابات الرابطة الأخيرة الشهر الماضي، فيما حصل التجمع الثقافي الديمقراطي على ثلاثة مقاعد.
yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; " />

yle="margin-top: 0px; margin-right: 0px; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; padding-top: 0px; padding-right: 0px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; ">

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